International Journal of Academic Research and Development

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International Journal of Academic Research and Development
Vol. 2, Issue 3 (2017)

ध्वनिकार के पूर्ववर्ती आचार्य : भामह


डाॅ0 पूनम राय

साहित्य-शास्त्र में जितनी कृतियाँ उपलब्ध हैं उनमें भरतकृत नाट्यशास्त्र प्राचीनतम है। नाम्ना यद्यपि यह नाट्यशास्त्र सम्बन्धी विषयों का ही ग्रन्थ प्रतीत होता है, किन्तु यह विविध कलाओं का आकार ग्रन्थ है। इतिहास में इस ग्रन्थ को इतना महत्व प्राप्त हुआ कि इसकी महिमा के प्रकाश में सजातीय ग्रन्थों की खद्योतमाला ऐसी निष्प्रभ हो गई कि काल की गति उन्हें सर्वथा विस्मृति के गर्त में धकेल गयी।
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डाॅ0 पूनम राय. ध्वनिकार के पूर्ववर्ती आचार्य : भामह. International Journal of Academic Research and Development, Volume 2, Issue 3, 2017, Pages 381-382
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