International Journal of Academic Research and Development

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International Journal of Academic Research and Development
International Journal of Academic Research and Development
Vol. 1, Issue 3 (2016)

अरूणाचल प्रदेश के लोक काव्य


डाॅ0 जयराम त्रिपाठी

अरूणाचल प्रदेश में कई जातियां निवास करती है जो अरूणाचल प्रदेश की सीमाओं को पार करके आयी थीं। वे अपने साथ अपने मूल पूर्वजीय क्षेत्रों की संस्कृति सभ्यता भी लायी थी। अतएव उनके संस्कार अपने अपने जाति समूहों के आधार पर निर्भर है। उनके लोकगीत अपनी-अपनी जाति संस्कृतियों के आधार पर प्रचलित है। विभिन्न वाह्य क्षेत्रों से आने के कारण उनकी भाषाओं एवं बोलियाँ भी भिन्न हैं। इसी कारण अरूणाचल प्रदेश में एक प्रांत भाषा बनाना भी कठिन हो रहा है। बौद्ध धर्मानुयायी जातियां अपनी अलग भाषा का दावा करती है। आदी जातियां अपनी आदी भाषा को आदी क्षेत्रानुसार सुदृढ़ कर रही है और वाज्जू, ताडसा, एवं नोक्ते जातियां अपनी अलग एक भाषा को प्रचलित कर रही हैं। अतएव भाषाओं एवं बोलियों में असमानता होने के कारण जातियों में अनेक विषयों पर अलगाव रहता है।
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डाॅ0 जयराम त्रिपाठी. अरूणाचल प्रदेश के लोक काव्य. International Journal of Academic Research and Development, Volume 1, Issue 3, 2016, Pages 65-67
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